मैं मदनपल्ली आकर बहुत खुश हूं।
मुझे बताया गया है कि मदनपल्ली उच्चकोटि की सिल्क के लिए प्रसिध्द है, जिससे उत्कृष्ट साड़ियां तैयार की जाती हैं। मैं अपनी पत्नी, पुत्री और पुत्रवधु के लिए यहां से एक-एक साड़ी लेकर जाऊंगा।
आन्ध्र प्रदेश की यह मेरी तीसरी विजय संकल्प रैली है। पहली, हैदराबाद में तेलंगाना क्षेत्र में थी, दूसरी आन्ध्र प्रदेश (विजयवाड़ा में) और यह तीसरी रैली रायलसीमा क्षेत्र में हो रही है।
भारतीय जनता पार्टी के लिए ये तीनों क्षेत्र समान रूप से महत्वपूर्ण है। हम तीनों क्षेत्रों की उसी तरह समान रूप से चिन्ता और परवाह करते हैं जिस प्रकार हम भारत के अन्य सभी राज्यों की चिन्ता और परवाह करते हैं।
रायलसीमा की महान विरासत रायलसीमा अपनी प्राचीन आध्यात्मिक विरासत के लिए विख्यात है। यह शेष भारत के लिए इसकी देन है। मैं तिरूमाला मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर; श्रीसेलाम में भगवान मल्लिकार्जुन; और पुट्टपर्थी के संत श्री सत्य साईं बाबा के चरणों में श्रध्दापूर्वक अपना मस्तक नवाता हूं।
इस भूमि ने संगीत रत्न त्यागराज जैसे महान कलाकारों, अन्तर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त जे0 कृष्णमूर्ति जैसे महान दार्शनिकों और गदीचेरला हरि सर्वोत्तम राव जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों को जन्म दिया है जिन्होंने इस क्षेत्र को ''रायलसीमा'' नाम दिया है।
मुझे बताया गया है कि मदनपल्ली का भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन से जुड़े दो महान नामों - डा0 एनीबेसेंट जिनके नाम पर बेसेंट थियोसोफिकल कॉलेज का नाम पड़ा है; और नोबेल साहित्यकार रवीन्द्रनाथ टैगोर जिन्होंने जन गण मन का बंगला से अंग्रेजी में अनुवाद किया था और जिसे मदनपल्ली में संगीत में पिरोया था, से गौरवपूर्ण संबन्ध रहा है।
रायलसीमा का अर्थ है - भारतीय इतिहास के एक महानतम राजा श्री कृष्णदेव राय द्वारा शासित भूमि। इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है कि रायलसीमा को ''रत्नमाला सीमा'' (रत्नों की भूमि) कहा जाता था। मैं कुछ महीनों पहले कृष्णदेव राय की राजधानी हम्पी में था। जैसा मैंने देखा, उससे मैं आश्चर्यचकित रह गया। मैंने सुना था कि यह क्षेत्र किसी समय प्रचुर समृध्दि की भूमि हुआ करता था जिसने विश्वभर से आगुंतकों को आकृष्ट किया।
कांग्रेस का कुशासन विगत के गौरव और वर्तमान निराशा के बीच अंतराल के लिए जिम्मेदार है। समृध्दि और संस्कृति के ऐसे गौरवपूर्ण इतिहास को देखते हुए रायलसीमा के पिछड़ा बने रहने का कोई कारण नहीं है। फिर भी, यह अनेक पहलुओं से पिछड़ा हुआ है और इसके पिछड़ेपन में कांग्रेस पार्टी जिसने स्वतंत्रता के बाद भारत और आन्ध्र प्रदेश पर लम्बे समय तक शासन किया है, द्वारा अपनाई गई नीतियों और प्रदान किए गए शासन से वृध्दि हो सकती है।
और यह विजय संकल्प रैली मेरी पार्टी का सन्देश देने के लिए आयोजित की गई है कि भारत की नीतियों में जबरदस्त बदलाव लाने और शासन में जबरदस्त परिवर्तन लाने की जरूरत है।
मित्रो, कल 14वीं लोकसभा का सत्र समाप्त हो गया है। 15वीं लोकसभा के चुनावों की शीघ्र घोषणा होने वाली है। आन्ध्र प्रदेश में विधान सभा के चुनाव भी साथ-साथ होंगे।
वर्ष 2004 में आन्ध्र प्रदेश ने राज्य में कांग्रेस की सरकार चुनी थी। इसने नई दिल्ली में कांग्रेसनीत यू.पी.ए. सरकार के गठन में बहुत बड़ा योगदान दिया था।
पांच वर्षों के बाद आन्ध्र प्रदेश के लोगों को अपने आप से पूछने का अवसर और एक जिम्मेदारी भी मिली है कि क्या उन्होंने सही निर्णय लिया था।
भ्रष्ट शासकों को जेल भेजा जाना चाहिए मुझे बताया गया है कि आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रायलसीमा से हैं। लेकिन मैंने उनके पांच वर्ष के शासनकाल के बारे में जो कुछ सुना है, उससे मुझे राज्य के भविष्य के बारे में अत्यधिक चिंता है क्योंकि कांग्रेस पार्टी यदि अगले पांच वर्ष के लिए फिर से चुन ली गई तो वह अपनी सत्ता का दुरूपयोग करती रहेगी।
आज भारत में ऐसी कोई सरकार नहीं है जो आन्ध्र प्रदेश की सरकार जैसी भ्रष्ट हो। इस सरकार ने प्रत्येक विभाग में हरेक ठेका देने, हरेक निर्णय लेने में शासन की गरिमा को घटाया है।
सत्यम/मेटास घोटाले ने भारत के आई. टी. उद्योग की विश्व स्तर पर बदनामी की है। यह वास्तव में एक राजनीतिक और सरकारी घोटाला है क्योंकि सत्यम के प्रमोटर्स सरकार में बैठे शक्तिशाली लोगों से सांठ-गांठ किए बगैर ऐसे कपटपूर्ण कृत्यों में शामिल नहीं हो सकते थे।
सन् 1985 में कांग्रेस पार्टी ने अपनी शताब्दी मनाई थी, तो राजीव गांधी ने अपने भाषण में खुलकर कहा था कि ''व्हीलर्स-डीलर्स'' की संस्कृति से पार्टी की काफी बदनामी की है। लेकिन जैसा हम आन्ध्र प्रदेश में देख रहे हैं क्या यह बुरी तरह की ''व्हीलिंग-डीलिंग'' नहीं है? सत्यम/मेटास घोटाला कोई छोटा घोटाला नहीं है। ऐसे अनेक घोटाले हुए हैं जिनकी जांच-पड़ताल किए जाने की जरूरत है।
मैं आन्ध्र प्रदेश के लोगों को यह आश्वासन देता हूं कि यदि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन (एनडीए) नई दिल्ली में अगली सरकार बनाने के लिए चुना जाता है तो हम यह सुनिश्चित करने के लिए हर तरह के कदम उठायेंगे कि आन्ध्र प्रदेश में हुए घोटालों की समुचित ढंग से जांच हो। आन्ध्र प्रदेश के कुछ लोगों को जेल जाना पड़ेगा, उसी तरह जैसे नरसिम्हा राव सरकार के एक भूतपूर्व कांग्रेसी मंत्री जो करोड़ों रूपये के टेलकॉम घोटाले में शामिल था, को न्यायालय द्वारा तीन साल की जेल की सजा सुनाई गई है।
आन्ध्र प्रदेश में काफी बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार फैल गया है क्योंकि इसे कांग्रेस हाईकमान और यू.पी.ए. सरकार के नेतृत्व द्वारा सहन किया जाता रहा है। जब कांग्रेस जुलाई 2008 में अल्पमत में पहुंच गई थी तो यू.पी.ए. सरकार अपने आप को बचाने के लिए एक बहुत ही घटिया राजनैतिक भ्रष्टाचार में कूद पड़ी। सांसदों को अपने पक्ष में समर्थन देने के लिए बड़े पैमाने पर धन का भुगतान करके उनकी खरीद-फरोख्त की गयी।
यदि हम शासन में इस तरह के भ्रष्टाचार को सहन करेंगे तो क्या भारत तरक्की कर सकता है?
मैं यहां एकत्र हुए लोगों से पूछना चाहता हूं : ''क्या कृष्णदेव राय ने अपने शासन के दौरान भ्रष्टाचार को सहन किया था? यदि वे भ्रष्टाचार को सहन करते तो क्या उन्हें एक आदर्श राजा के रूप में आज याद किया जाता?''
जहां तक भारतीय जनता पार्टी का सम्बन्ध है हम ''भ्रष्टाचार से कोई समझौता नहीं'' वाली नीति अपनायेंगे।
मैंने हाल ही में पढ़ा कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत मांगे गए एक जवाब में कहा है कि केन्द्र सरकार के मंत्रियों को अपनी सम्पत्तियों तथा अपने निकट सम्बन्धियों की सम्पत्तियों का ब्यौरा देने से छूट है। यह गलत है। जो लोग सरकार के उच्च पदों पर बैठे हैं उन्हें दूसरों के लिए उदाहरण पेश करना चाहिए। यदि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन (एनडीए) अगले संसदीय चुनाव में जनादेश हासिल करती है तो हम सभी मंत्रियों के लिए यह अनिवार्य बनायेंगे कि वे अपनी सम्पत्तियों और अपने निकट सम्बन्धियों की सम्पत्तियों का वार्षिक आधार पर ब्यौरा दें।
यू.पी.ए. सरकार की उपलब्धियां : असुरक्षित भारत, असुरक्षित नागरिक मित्रो, मताधिकार जनता के हाथ में एक सशक्त हथियार है। इसका सही ढंग से इस्तेमाल किया जाना चाहिए। मतदाता उन लोगों को दंडित कर सकता है जो अपने वादों पर खरा उतरने में विफल रहे हैं। मतदाता ऐसी सरकार को सत्ता में वापस लाने के लिए अपने मत का इस्तेमाल कर सकता है जिसका अच्छा सेवा रिकार्ड रहा हो।
श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन (एनडीए) ने सन् 1998 से लेकर 2004 के बीच सरकार चलाई थी। हमने देश को आगे ले जाने के लिए उन छह सालों में क्या किया यह सभी लोग जानते हैं।
पिछले पांच वर्षों में :- आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छूने लगीं।
- राजमार्ग परियोजना जैसे प्रमुख आधारभूत ढांचा सम्बन्धी पहलों की बुरी तरह उपेक्षा की गई।
- राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन (एनडीए) वर्ष 2004 में एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था छोड़कर गई थी। यू.पी.ए. सरकार वर्ष 2009 में अपने पीछे गहरे संकट में पड़ी अर्थव्यवस्था छोड़कर जायेगी। यू.पी.ए. सरकार रोजगार के नये अवसर पैदा करने में विफल रही, लेकिन इसने वास्तव में भारी संख्या में नौकरियां समाप्त होने की स्थितियां पैदा कर दी। एक अनुमान के अनुसार आर्थिक संकट के कारण एक करोड़ से ज्यादा नौकरियां जाने वाली हैं।
- यू.पी.ए. सरकार के कार्यक्रम कार्यान्वयन में इतनी अधिक खामियां हैं कि हाल ही में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने सरकार को इस बात के लिए फटकार लगाई है कि उसने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना जैसी योजनाओं के लिए निर्धारित 51,000 करोड़ रूपये की भारी धनराशि का सही लेखा-जोखा नहीं दिखाया है।
- हाल के एक अध्ययन के अनुसार गरीबी की रेखा से नीचे बसर कर रहे लोगों की संख्या 5.5 करोड़ तक पहुंच गई है - अथवा इसमें 20 प्रतिशत की वृध्दि दर्शायी है।
सबसे ज्यादा दु:ख मुझे किसानों की दुर्दशा देखकर हुआ। इन पांच वर्षों में ऋण में डूबे हजारों किसानों ने आत्महत्याएं कीं। इनमें सबसे ज्यादा आन्ध्र प्रदेश के किसान हैं।
वर्ष 2006 में मैंने अपनी भारत सुरक्षा यात्रा के दौरान आन्ध्र प्रदेश के कई भागों का दौरा किया जहां किसानों ने आत्महत्याएं की थीं। चूंकि, में सड़क से यात्रा कर रहा था तो मैंने एक जगह पर एक सोती हुई बड़ी सी प्रतिमा देखी। मैंने वैंकेया नायडूजी से पूछा कि यह क्या है? उन्होंने जवाब दिया ''यह कुम्भकर्ण है।'' मैंने अपनी यात्रा के दौरान अपने बाद के भाषणों में इस प्रतिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार भी कुम्भकर्ण की तरह सोई हुई है और वास्तव में उसे जगाना होगा। लेकिन इसने जागने से इनकार कर दिया। इसलिए, कांग्रेस को बताने के लिए मतदाताओं का समय आ गया है, ''आप अगले पांच सालों तक नींद में सोए रहें। हमने सत्ता की बागडोर भारतीय जनता पार्टी और एन.डी.ए. को सौंपने का निर्णय ले लिया है।''
रायलसीमा के किसान पानी की किल्लत से पीड़ित होने के बावजूद बहुत अच्छे ढंग से खेती करते हैं। मुझे बताया गया है कि मदनापल्ली एशिया में टमाटर और ईमली का एक शीर्ष उत्पादक है।
यह हर कोई समझ सकता है कि यदि किसान आसमान की अनिश्चितता का शिकार हो जाए तो थोड़ा-बहुत कुछ किया जा सकता है, यद्यपि एक दूरदर्शी सरकार इसके लिए कई कारगर कदम उठा सकती है। लेकिन तब क्या किया जाए यदि किसान सुल्तानी कुशासन के ही शिकार हो जाएं।
मुझे बताया गया है कि रायलसीमा के किसानों को खेती में बहुत दिक्कतें आ रही हैं क्योंकि सरकार उर्वरकों की सही आपूर्ति सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल रही है। खेती के लिए बिजली की सप्लाई में कटौती से फसलें नष्ट हो गई हैं। किसानों के ऋण माफ करने की ढपोलशंखी योजना केवल एक दिखावा है। यहां एकत्र हुए कितने किसानों को इस योजना से लाभ पहुंचा है। जिन लोगों को फायदा हुआ है, कृपया वे अपना हाथ उठाएं। और जिन लोगों को इस योजना से फायदा नहीं हुआ है अब वे अपने हाथ ऊपर करें। इसी बात से लोगों का फैसला देखा जा सकता है।
लेकिन मैं यहां केवल इस बात पर प्रकाश डालने के लिए नहीं आया हूं कि कांग्रेस किन-किन क्षेत्रों में विफल रही है और इसने किसानों, युवाओं और समाज के दूसरे वर्गों से कैसे धोखा दिया है।
रायलसीमा और आन्ध्र प्रदेश के किसानों से मुझे कई ठोस वादे करने है :
- सबसे पहले हम नदी जुड़ाव परियोजना को सही ढंग से कार्यान्वित करेंगे जिसपर वाजपेयी सरकार द्वारा काम शुरू किया गया था लेकिन जिसे यू.पी.ए. सरकार द्वारा पूरी तरह से छोड़ दिया गया। नदियों को जोड़े बगैर इस क्षेत्र में न तो स्थायी आधार पर पेयजल की समस्या और न ही सिंचाई का संकट दूर हो सकता है। मैं यहां आपको याद दिलाता हूं कि गंगा-कावेरी योजना (जिसे पहले इसी नाम से पुकारा जाता था) की सबसे पहले परिकल्पना आन्ध्र प्रदेश के एक विख्यात व्यक्ति-डा0 के.एल. राव द्वारा की गई थी।
- किसानों को चार प्रतिशत ब्याज दर पर कृषि ऋण उपलब्ध कराये जायेंगे।
- हम सीधे किसानों को ही विभिन्न सब्सिडियां देंगे। ये सब्सिडी बिचौलियों, जो बीच में ही इनसे फायदा उठा लेते हैं, के माध्यम से नहीं दी जायेंगी।
- जैसा कि गुजरात में हुआ है हम कृषि के लिए बिजली की पर्याप्त सप्लाई करेंगे।
- छोटे किसानों के लिए कृषि आय गारंटी बीमा योजना और वृध्द किसानों के लिए एक पेंशन योजना लागू करेंगे। यदि सरकारी कर्मचारियों को पेंशन मिल सकती है तो किसानों को क्यों नहीं?
- हम सभी फसलों के लिए लाभकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य उपलब्ध करायेंगे जो उत्पादन लागत पर 50 प्रतिशत जोड़ने के बाद निर्धारित किया जाएगा।
संक्षेप में कहें, हमारा यह प्रयास होगा कि
किसी भी किसान को आत्महत्या करने पर मजबूर न होना पड़े। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन (एनडीए) की भावी सरकार कृषि, ग्रामीण विकास, छोटे तथा मझौले उद्योगों और अनौपचारिक तथा असंगठित क्षेत्रों में बदलाव लाने के लिए एक बड़ी नीति लायेगी ताकि उन्हें भारत की भावी विकास नीति में सही स्थान मिल सके। यही एक मार्ग है जिससे हम रोजगार के अधिक अवसर पैदा कर सकते हैं, सतत् आर्थिक विकास एवं समान आधार पर विकास ला सकते हैं तथा गरीबी को दूर कर सकते हैं।
मेरा यह सपना रहा है कि भारत का हरेक क्षेत्र और भारतीय समाज का प्रत्येक वर्ग समृध्दि और खुशहाली का फल चखे - जैसाकि वास्तव में कृष्णदेव राय के शासनकाल में होता था।
भारत सुरक्षा यात्रा के दौरान मैंने यू.पी.ए. सरकार की वोट बैंक राजनीति के कारण भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए खड़े खतरे की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। तबसे आतंकवाद की समस्या और भी अधिक खतरनाक हो गई है।
आतंकवाद के इस खतरे से लड़ने की भारतीय जनता पार्टी की नीति बहुत स्पष्ट है :
आतंकवाद के साथ कोई समझौता नहीं। चूंकि मैं आन्ध्र प्रदेश में हूं। मैं छोटे राज्य बनाने की जरूरत के बारे में अपनी पार्टी की प्रतिबध्दता को पुन: दोहराना चाहूंगा। मैं एक अलग तेलगांना बनाने की मांग का पूरी तरह समर्थन करता हूं। साथ ही मैं यह भी चाहता हूं कि यह एक सौहार्दपूर्ण तरीके से हो और इससे एक ऐसा रास्ता बने जिससे रायलसीमा सहित तेलगांना और शेष आन्ध्र प्रदेश दोनों तेजी से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ें।
विजय संकल्प रैली का यही संदेश है और यही संकल्प है।
धन्यवाद