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भारत सुरक्षा यात्रा
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जेहादी आतंकवाद तथा वामपंथी उग्रवाद से
राष्ट्रीय सुरक्षा अक्षुण्ण रखने के लिए

अल्पसंख्यकवाद की विघटनकारी राजनीति से
राष्ट्रीय एकता की रक्षा के लिए

उच्चस्तरीय भ्रष्टाचार तथा अपराधीकरण से
शासन को मुक्त कराने के लिए

संस्थागत दुरूपयोग तथा कांग्रेस पार्टी की मिथ्या 'त्याग' संस्कृति से
संसदीय लोकतंत्र के बचाव के लिए

आकाश छूती कीमतों, बेरोजगारी तथा कर्ज से
''आम आदमी'', गरीब और किसान के बचाव के लिए

भारतीय जनता पार्टी ने 6 अप्रैल से 10 मई 2006 तक भारत सुरक्षा यात्रा के रूप में एक राष्ट्रव्यापी राजनीतिक जन अभियान का श्री गणेश किया है। यह अभियान दो यात्राओं में विभक्त है। एक है पूर्व उप-प्रधानमंत्री एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता श्री लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में द्वारका (गुजरात) से दिल्ली तक और दूसरी भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में जगन्नाथ पुरी (उड़ीसा) से दिल्ली तक।

श्री आडवाणी की यात्रा 6,000 कि.मी. की होगी और यह गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आन्ध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश व हरियाणा से होती हुई दिल्ली पहुंचेगी। श्री राजनाथ सिंह की यात्रा की लम्बाई 5500 कि.मी. है और यह उड़ीसा, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तरप्रदेश, उतरांचल, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश व जम्मू कश्मीर से गुजरती हुई दिल्ली पहुंचेगी। कुल मिलाकर ये यात्रांए 17 राज्यों में 11,500 कि.मी. का फासला तय करेगी।
 
''यात्रा'' के परम्परागत भारतीय विचार का भाजपा ने किया आधुनिकीकरण

'यात्रा' भारत में राष्ट्रीय एकात्मता का युगों पुराना माध्यम है। हमारे हजारों वर्ष के इतिहास में भारत के लोगों ने अपने धर्मस्थलों के दर्शन, ज्ञान की खोज और आध्यात्मिक मुक्ति पाने के लिए देश के एक कोने से दूसरे कोने तक यात्राएं की हैं। सामाजिक और धार्मिक नेताओं ने भी लोगों में जागृति पैदा करने के लिए और उसके द्वारा सामाजिक सौहार्द, देशभक्ति व एकता उत्पन्न करने के लिए यात्राओं के माध्यम को ही अपनाया है।

भारतीय जनता पार्टी को गर्व है कि उसने वर्तमान में मूलत: भारतीय परम्पराओं को पुनर्जागृत कर आयातित 'रोड़ शो' के विदेशी विचार को नकार कर 'यात्रा' को ही राजनीतिक जन अभियान के रूप में पुनर्जीवित किया है। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए जनमत जागृत करने के लिए 1990 में आडवाणी जी की रामरथ यात्रा भारत के इतिहास में एक प्रमुख मील के पत्थर के रूप में स्थापित हुई थी। भारतीय स्वतंत्रता की स्वर्णजयंती के उपलक्ष्य में 1997 में उनकी 'स्वर्ण जयंती रथ यात्रा' द्वारा स्वतंत्रता संग्राम के समस्त शहीदों व नायकों को नमन किया गया था। 2004 में उनकी 'भारत उदय यात्रा' में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के 6 वर्ष के कार्यकाल में भारत की अभूतपूर्व उपलब्धियों का सन्देश घर-घर तक पहुंचाया गया था। इसी प्रकार 1991-92 में डा0 मुरली मनोहर जोशी की 'एकता यात्रा' ने इस राष्ट्रीय संकल्प की अभिव्यक्ति की थी कि कश्मीर सदैव भारत का अभिन्न अंग रहा है और सदैव रहेगा। इसके अतिरिक्त भाजपा ने 1993 में 'जनादेश यात्रा' और 1996 में 'सुराज यात्रा' और कई अन्य यात्राओं के माध्यम से भारत के लोगों तक अपना सामाजिक - राजनीतिक संदेश पहुंचाया था।

इस यात्रा को प्रारंभ करने और समाप्त करने की तारीखें बहुत अधिक महत्व रखती हैं। 6 अप्रैल को रामनवमी है जिस दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था। यह भाजपा का संस्थापना दिवस भी है। 1980 में पार्टी की स्थापना इसी दिन हुई थी। 10 मई भी एक पावन दिन है। इसी दिन 1857 में भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की शुरूआत हुई थी जो भारत के इतिहास में हिन्दू-मुस्लिम एकता की युगान्तरकारी घटना थी। वीर सावरकर ने अपनी प्रेरण्ाादायी पुस्तक भारतीय इतिहास के शानदार अध्याय में लिखा कि वो दिन थे जब हिन्दू और मुसलमानों ने घोषणा की कि भारत उनका देश है और वे सभी बंधु बांधव हैं, उन दिनों हिन्दू और मुसलमानों ने एकजुट होकर दिल्ली में राष्ट्रीय स्वतंत्रता का ध्वज उठाया। वे महान दिन भारतीय इतिहास में सदैव अविस्मरणीय रहेंगे। संयोगवश इस ऐतिहासिक घटना की 150वीं वर्षगांठ इस वर्ष 10 मई से ही प्रारंभ होगी। अतएव श्री आडवाणीजी अपनी यात्रा के दिल्ली पहुंचने से पहले मेरठ में 1857 के शहीदों को श्रध्दांजलि अर्पित करेंगे।

एक और यात्रा क्यों? अभी क्यों?

प्रिय देशवासियों! इस जन जागरण अभियान की शुरूआत स्वतंत्र भारत के इतिहास के एक निर्णायक मोड़ पर हो रही है। कांग्रेस नेतृत्व वाले संप्रग सरकार के साम्यवादी समर्थन से मई 2004 में हुई संस्थापना से ही हमारे देश के आधारभूत राजनीतिक मूल्यों में क्षय होता दिखाई पड़ रहा है। सरकार ने एक ओर संजोए गए लोकतंत्रीय आदर्शों पर प्रहार प्रारंभ कर दिया है, लोकतांत्रिक संस्थाओं की पवित्रता को क्षयित किया है, केन्द्रीय सरकार में अपराधियों और घोटालेबाजों को शामिल कर लिया है तथा ''आम आदमी'', गरीब और किसान की दशा को सुधारने के लिए किए गए वायदों के साथ छल किया है। वहीं दूसरी ओर, सरकार ने विघटनकारी राजनीति का खेल खेलना शुरू कर दिया है जिससे एक भारतवासी दूसरे भारतवासी के विरोध में खड़ा हो गया है। इससे राष्ट्र की अखण्डता तथा एकता कमजोर हुई है। मई 2004 में संप्रग गठबन्धन को सत्ता सौंपे जाने की भूल को जब तक सुधारा नहीं जाता है तब तक हमारे देश को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती ही रहेगी।

यह पुस्तिका आपके सम्मुख ''भारत सुरक्षा यात्रा'' के सन्दर्भों, प्रयोजनों और उद्देश्यों का एक सिंहावलोकन प्रस्तुत करती है। राष्ट्रीय एकता, राष्ट्रीय सुरक्षा, प्रजातंत्र की रक्षा, सरकार में शुचिता और आम जनता की आर्र्थिक सुरक्षा को मजबूत करने वाले सूत्रों को एक साथ पिरोकर यह भारत सुरक्षा यात्रा की परिकल्पना का सांगोपांग परिदृश्य प्रस्तुत करती है। हमारा आपसे अनुरोध है कि आप इस पुस्तिका को स्वयं पढ़े, दूसरों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित करें और इसकी विषय वस्तु पर भारत के एक जिम्मेदार व सजग नागरिक के रूप में चर्चा करें।

''अल्पसंख्यकवाद'' की राजनीति के खतरे

आज भारत में कांग्रेस की उसी वोट बैंक राजनीति के पुनर्दर्शन हो रहे हैं जिसे जनता ने नब्बे के दशक के जनादेश में नकार दिया था। साम्यवादी तथा अन्य दलों के साथ मिलीभगत कर कांग्रेस अल्पसंख्यकवाद की राजनीति की प्रतिस्पध्र्दा में जुटी है और दु:ख की बात यह है कि इस गलत नीति का बचाव सेकुलरवाद का ढाेंग रच कर हो रहा है। अपनी विशुध्द हिन्दू संस्कृति व अवधारणा के कारण भारत सदैव पंथनिरपेक्ष रहा है और भविष्य में भी सदा रहेगा। पंथआधारित राज्य की अवधारणा को नकारते हुए सर्वपंथसमभाव हमारे समाज व राज्य व्यवस्था के आधार रहे हैं। भाजपा का विश्वास है कि भारतीय समाज की अनेकता में जाति व पंथ के भेदभाव बिना सभी के साथ समान व्यवहार होना चाहिए और सभी की समान देखभाल होनी चाहिए। 1980 में पार्टी के जन्म के समय से ही ''सब को न्याय, तुष्टिकरण किसी का नहीं'' हमारा सिध्दांत रहा है।

राजनैतिक जीवन में भाजपा अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक, इन दो अलग भावनाओं को चिरस्थायी बनाकर देश को बांटने के विरूध्द है। इसी विभाजनकारी मानसिकता ने ही मुस्लिम लीग को देश विभाजन की मांग उठाने और 1947 में इसे हिंसा के द्वारा मनवाने के लिए प्रेरित किया। अत्यंत चिंता का विषय तो यह है कि अपने खोये हुए मुस्लिम वोट बैंक को प्राप्त करने के लिए कांग्रेस 1947 के पूर्व की मुस्लिम लीग के पदचिन्हों पर चल रही है। अल्पसंख्यकवाद की नीतियों को अपनाकर कांग्रेस न केवल मुस्लिम समाज में रूढ़िवाद और कट्टरता को प्रोत्साहित कर रही है, बल्कि भारतीय राष्ट्रीयता को भी ताक पर रख रही है।

कांग्रेस की सहायता से बंगलादेश से होने वाला जनसांख्यिक आक्रमण

गत 25 वर्षों से, कांग्रेस पार्टी ने केवल वोटों के लिए बंगलादेश के घुसपैठियों को नियोजित रूप से शरण दी है तथा असम, पश्चिम बंगाल (जहां साम्यवादियों ने भी इस राष्ट्र विरोधी अपराध में कांग्रेस की मदद की है) तथा पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के अन्य राज्यों में उन्हें मतदाता सूचियों में शामिल कराया है। अब तक दो करोड़ से अधिक बंगलादेशी भारत में बस चुके हैं। जुलाई, 2005 में उच्चतम न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक निर्णय द्वारा आई0एम0डी0टी0 एक्ट, 1985 को असंवैधानिक ठहराकर निरस्त कर दिया था। उच्चतम न्यायालय ने माना था कि उक्त अधिनियम के उपबंध, जिनका साम्यवादियों तथा कांग्रेस ने शिद्दत से बचाव किया था, जानबूझकर घुसपैठियों की सहायता के लिए बनाए गए थे। न्यायालय ने चेताया था कि ''भारी संख्या में बंगलादेशी अवैध प्रवासियों के कारण असम राज्य को बाह्य तथा आंतरिक उपद्रवों का सामना करना पड़ रहा है। ''उक्त निर्णय ने आईएमडीटी एक्ट को निरस्त करने की भाजपा की लगातार मांग को सौ फीसदी सही ठहरा दिया है।

स्तब्ध करने वाली बात यह है कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद संप्रग सरकार बंगलादेशी घुसपैठियों के बचाव हेतु अन्य कानूनी सरंक्षण जुटाने के लिए जमीन-आसमान एक किए हुए हैं। इस प्रयोजन के लिए सरकार कुख्यात आईएमडीटी एक्ट के सारे दुष्टतापूर्ण उपबन्धों को विदेशीजन अधिनियम में शामिल करके उन्हें समूचे देश पर लागू करने जा रही है। भारत राष्ट्र के साथ इससे बड़ा विश्वासघात शायद ही कोई हो। अपना एक बंधुआ वोट बैंक बनाने के लिए कांग्रेस पार्टी तथा संप्रग सरकार हमारी राष्ट्रीय एकता तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रही है। असम के अनेक लोगों को भय सता रहा है कि यदि घुसपैठ इसी गति से जारी रहती है तो दस वर्ष के भीतर कोई बंगलादेशी घुसपैठिया ही असम का मुख्यमंत्री होगा। यहां सक्रिय अलकायदा तथा आईएसआई को संरक्षण प्राप्त होगा तथा असम की हालत जम्मू-कश्मीर से भी बदतर होगी।'' उत्तर-पूर्व क्षेत्र की केवल 2 प्रतिशत सीमा भारत से जुड़ी है और शेष 98 प्रतिशत सीमाएं बंगलादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल और चीन से लगती है। इससे ही इस क्षेत्र के स्टै्रटेजिक महत्व को समझा जा सकता है। यदि कांग्रेस के समर्थन से होने वाले इस जनसांख्यिक आक्रमण को रोका तथा उलटा नहीं जाता है तो 1947 के पूर्व के दिनों के संयुक्त भारत में से एक तीसरे इस्लामिक राष्ट्र के उदय की निकट प्रबल संभावना है।

सेना में मुसलमानों की गणना

संप्रग सरकार ने सेना, नौसेना तथा वायु सेना में मुसलमानों की गिनती को प्रोत्साहित करके सशस्त्र बलों में साम्प्रदायिकता का विष घोलने का प्रयास किया है। यह स्वाभाविक ही है कि सशस्त्र बलों के सेवारत तथा सेवानिवृत दोनों प्रकार के अधिकारियों ने इस कार्य को अनुचित ठहराया है। भारत के सशस्त्र बल भारत की राष्ट्रीय एकता के अभिरक्षक तथा मूर्तिमान रूप है। उसमें सभी मजहबों के लोग सेवारत है तथा उनकी भर्ती अथवा पदोन्नति में मजहब के आधार सहित किसी भी आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता है। उनके द्वारा सभी मजहबों के पूजा स्थल बनाए जाते हैं। उनमें किसी भी सम्प्रदाय के प्रति पक्षपात अथवा भेदभाव नहीं होता है।

अत: यह बड़ी चोट पहुंचाने वाली बात है कि संप्रग सरकार ने हमारे सशस्त्र बलों में मुस्लिम गणना की अनुमति देकर विघटनकारी प्रवृत्तियां फैलाने का प्रयास किया है। भाजपा तथा अन्य राष्ट्रवादी शक्तियों के सामयिक तथा प्रचंड विरोध के कारण ही इस दुष्टतापूर्ण मंसूबे पर शुरूआत में ही रोक लग सकी थी।

साम्प्रदायिक आरक्षण

संप्रग सरकार ने आरक्षण के मुद्दे पर राष्ट्र की सर्वानुमति को भंग कर डाला है। इस सरकार ने मजहब आधारित आरक्षणों की बाढ़ सी ला दी है। उच्चतम न्यायालय ने 5 जनवरी, 2006 को आन्ध्रप्रदेश की कांग्रेस सरकार के रोजगार और शिक्षा के क्षेत्र में मुसलमानों को 5 प्रतिशत कोटा आरक्षित करने के फैसले को निरस्त कर दिया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर चिकित्सकीय/इंजीनियरिंग पाठयक्रमों में मुसलमानों का 50 प्रतिशत आरक्षण देने के निर्णय को निरस्त कर दिया था। फिर भी संप्रग सरकार साम्प्रदायिक कोटा जारी रखने का कोई न कोई बहाना ढूंढ रही है। रोजगार तथा शिक्षा के अधिक अवसर दिए जाने की मांग के साथ शुरू हुई बात तेजी से जीवन के सभी क्षेत्रों में जिसमें सशस्त्र बल, संसद तथा राज्य विधान मंडल भी शामिल है, साम्प्रदायिक कोटे की मांगों में बदलती जा रही है। कांग्रेस पार्टी से शह पा रही इस खतरनाक प्रवृत्ति का भाजपा विरोध करती है। इस सन्दर्भ में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा साम्प्रदायिक आरक्षणों की अवधारणा के बारे में दी गई चेतावनी को स्मरण करना उपयोगी होगा:''यह मार्ग न केवल गलत है वरन् आपदाओं से भी भरा है।

जेहादी आतंकवाद

 जेहादी आतंकवाद का मुकाबला करने में सरकार बेहद ढील बरत रही है। अयोध्या के राम मंदिर में, दीपावली से पूर्व दिल्ली में व हाल ही में वाराणसी में हुए बम-विस्फोट और इससे पूर्व जम्मू के रघुनाथ मंदिर तथा गांधीनगर के अक्षरधाम मंदिरों पर हुए हमले इस बात के सबूत हैं कि जेहादी भारत में साम्प्रदायिक तनाव पैदा करना चाहते हैं। यह कारनामें यह भी दर्शाते हैं कि पाकिस्तान में अभी भी भारत के विरूध्द आतंकवाद का बुनियादी ढांचा मौजूद है। बांग्लादेश भी सीमापार आतंकवाद के दूसरे ''लांचिग पैड'' के रूप में उभरकर आया है। संप्रग सरकार ने आतंकवाद के बढ़ते तंत्रजाल और भारत में उसको समर्थन देने वालों की ओर से आंखें मूंद ली हैं। कांग्रेस तथा उसके सहयोगी दल राष्ट्रीय सुरक्षा तथा अखंडता के लिए बढ़ रहे इस गंभीर खतरे के प्रति लोगों को सचेत करने में पूरी तरह विफल रहे हैं। संप्रग सरकार ने जेहादी आतंकवाद और उसको समर्थन देने वाली राष्ट्र-विरोधी विचारधारा के विरूध्द कानूनी, प्रशासनिक तथा राजनीतिक कड़ाई बरतने के बजाए पहला कार्य पोटा कानून को समाप्त करने का किया।

केरल विधानसभा का आतंकवादी रणनीतिकार मदनी को रिहा करने का प्रस्ताव

हाल ही में केरल विधानसभा के कांग्रेस, मुस्लिम लीग तथा साम्यवादी पार्टियों के विधायकों ने विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया जिसमें 1998 में कोयम्बटूर में हुए लगातार बम-धमाकों के रणनीतिकार अब्दुल नासिर मदनी की रिहाई चाही गई है। इन धमाकों में 58 लोगों की मृत्यु हुई थी। हत्या की इस साजिश का मुख्य निशाना श्री लालकृष्ण आडवाणी थे जो उस समय चुनाव प्रचार के लिए कोयम्बटूर गए थे। मदनी तमिलनाडु की एक जेल में है तथा उस पर मुकदमा चल रहा है। केरल के दोनों प्रतिद्वन्द्वी राजनीतिक मोर्चों ने आगामी चुनावों में मात्र मुस्लिम मतों को दृष्टि में रखकर ''मानवीय आधार'' पर उसकी रिहाई किए जाने के लिए हाथ मिला दिया है।

संप्रग की अल्पसंख्यकवाद की राजनीति के अन्य उदाहरण है - अल्पसंख्यकों के मामलों के लिए अलग मंत्रालय का गठन; इतिहास की पाठय-पुस्तकों का इस प्रकार संशोधन कि उनमें साम्प्रदायिकता तथा पृथकता को सम्मान मिले; और ईरान की परमाणु नीति तथा राष्ट्रपति बुश के भारत दौरे सम्बन्धी भारत की विदेश नीति का संप्रग के कुछ सहभागियों द्वारा सम्प्रदायीकरण। संक्षेप में, एक ऐसी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है जिससे भारत का मजहब के आधार पर ध्रुवीकरण हो जाएगा। यदि इस पर अंकुश नहीं लगाया गया तो इस ध्रुवीकरण के भारत की एकता, अखण्डता तथा सुरक्षा के लिए गंभीर परिणाम निकलेंगे।

भारत के मुसलमानों से भाजपा की अपील
 
भाजपा भारतीय मुसलमानों से अपील करती है कि वे हमारे राजनैतिक विरोधियों के इस स्वार्थी व झूठे दुष्प्रचार में न आये कि भाजपा इस्लाम या किसी अन्य मजहब के अल्पसंख्यकों की विरोधी है। हम सबकी मजहबी आस्थाआें की पूरी स्वतंत्रता को पवित्र समझते हैं। लेकिन हमारा यह दृढ़ विश्वास है कि अल्पसंख्यकवाद की राजनीति न मुस्लिम भाइयों के ही हित में है और न ही भारत राष्ट्र के। कांग्रेस की उत्तरोत्तर सरकारों ने गरीब मुसलमानों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए कुछ नहीं किया है। कांग्रेस पार्टी मुसलमानों को अपनी कुत्सित राजनीति की शतरंज में एक मोहरे के रूप में उपयोग कर रही है और हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच गहरी खाई खोद रही है। हमारे राजनैतिक प्रतिद्वन्द्वी समझते हैं कि जाति के आधार पर हिन्दू समाज को विभक्त करना व मुसलमानों को वोट बैंक के रूप में इकट्ठा करना ही उनकी सत्ता प्राप्ति की लोलुपता का पूरा करने के लिए रामबाण है। यह एक खतरनाक व संकीर्ण रणनीति है, जो प्रजातंत्र और राष्ट्रीय एकता दोनों को क्षीण कर देगी।

नक्सली हिंसा

संप्रग सरकार के पास नक्सली हिंसा का मुकाबला करने के लिए कोई स्पष्ट तथा दीर्घव्यापी नीति नहीं है जो भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बन गई है। संप्रग सरकार की नीति के कारण नेपाल में माओवादी विद्रोह बेकाबू होता जा रहा है और इस कारण से काठमांडू से कोच्चि तक के उनके बढ़ते रेड कॉरिडोर के कारण इन राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था के गड़बड़ाने से उनके हौंसले बुलन्द हो गए हैं। नक्सली हिंसा से प्रभावित कई राज्यों में कांग्रेस ने माओवादियों से राजनीतिक सौदेबाजी करके साधारण नागरिक के जीवन व सम्पत्ति को खतरे में डाल दिया है। संप्रग सरकार नक्सली संकट को राज्य का मुद्दा मानती है जिसके साथ केवल प्रभावित राज्यों को ही जूझना होता है। इस सरकार ने वाजपेयी सरकार द्वारा अपनायी गई सुविचारित नीति को पूरी तरह त्याग दिया है जिसके तहत इस संकट का मुकाबला सभी प्रभावित राज्य सरकारों के साथ मिलकर एक केन्द्रीयकृत कमांड स्ट्रक्चर बनाकर किया जाना था। आज देशवासियों को जेहादियों और माओवादियों दोनों से खतरा है। कई मामलों में ये दोनों गुट पूर्वोत्तर भारत में मिलकर पृथकतावादी आंदोलन चलाते हैं।

यद्यपि नक्सलवादी गरीबों का मसीहा होने का दावा करते हैं, पर वे वास्तव में गरीबों तथा शोषितों के घोर शत्रु हैं क्योंकि ये देश के कई सबसे पिछड़े क्षेत्रों में हिंसा और आतंक का माहौल पैदा करके इन क्षेत्रों को विकास प्रक्रिया से वंचित कर रहे हैं। इससे गरीब लोग अधिक गरीबी तथा बेरोजगारी की दयनीय स्थिति में पहुंच गए हैं। भाजपा अतिवाद से ग्रस्त क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़े वर्गों और अन्य समुदायों से संबंधित गरीबों के द्रुत सामाजिक-आर्थिक विकास का पूरी शिद्दत से समर्थन करती है।

भ्रष्टाचार व अपराधीकरण

स्वतंत्र भारत के इतिहास में इससे पहले कोई भी सरकार भ्रष्टाचार और अपराधीकरण के दो शर्मनाक जन्मजात लक्षण लेकर अस्तित्व में नहीं आई। डा0 मनमोहन सरकार में आधे दर्जन से अधिक ऐसे व्यक्तियों को मंत्रीपद से सुशोभित किया गया है, जो हत्या से लेकर भ्रष्टाचार तक के घृणित आपराधिक मामलों में संलिप्त है। संप्रग सरकार ने उस इटलीवासी भगौड़े ओत्तावियो क्वात्रोच्चि को लंदन में सील हुए खातों से बोफोर्स घूस के इक्कीस करोड़ रूपये ले जाने की अनुमति दे दी। यह वह क्वात्रोच्चि है जो बड़े गर्व से अपने आपको श्रीमती सोनिया गांधी के परिवार का घनिष्ठ मित्र घोषित किया करता है। इससे हमारा आरोप पुष्ट होता है कि ''कांग्रेस का हाथ, क्वात्रोच्चि के साथ'' है। वोल्कर समिति ने कांग्रेस पार्टी को इराक के बदनाम ''अनाज के बदले तेल'' घोटाले का एक लाभ भोगी माना है, इस घोटाले में एक केन्द्रीय मंत्री को विवश होकर अपना पद छोड़ना पड़ा था। अभी हाल ही में कांग्रेस पार्टी के और संप्रग सरकार के कई बड़े नेता 18 हजार करोड़ रूपये के स्कोर्पियन पनडुब्बी सौदे में लिप्त हुए पाये गए हैं। आरोप है कि इस मामले में उन देशी और विदेशी बिचौलियों द्वारा कांग्र्रेस पार्टी को 5 सौ करोड़ रूपये से अधिक की घूस दी गई थी जो नौ सेना की गंभीर ''वार रूम लीक'' घटना में फंसे हुए हैं।

भाजपा स्वीकार करती है कि आम जनता को प्रशासन के साथ जुड़ते समय व्यवहार करने में स्थानीय तथा निम्नस्तरीय भ्रष्टाचार से अधिक पीड़ा पहुंचती है। भाजपा सदैव से ही भ्रष्टाचार मुक्त भारत (सरकार के उच्च तथा निम्न दोनों स्तरों पर) के अभियान की प्रबल पक्षधर रही है। फिर भी हमारा विश्वास है कि इस सम्बन्ध में सही उदाहरण प्रस्तुत करने का दायित्व उच्च पदों पर बैठे हुए लोगों पर अधिक है। कांग्रेस पार्टी द्वारा प्रस्तुत किए गये गलत उदाहरणों के कारण ही देश में भ्रष्टाचार की संस्कृति का बोलबाला है। भाजपा का विश्वास है कि भ्रष्टाचार न केवल भारत के विकास के लिए एक ठोस खतरा है बल्कि इसने भारत के लोकतंत्र और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर दिया है।

कांग्रेस अध्यक्ष के 'ढोंगी' बलिदान का दूसरा अध्याय

दो वर्ष के अल्पकाल में ही संप्रग सरकार ने दलगत लाभ के लिए जनतांत्रिक संस्थाओं के निर्ल्लजतापूर्वक दुरूपयोग करने का एक लम्बा इतिहास रचा है। इसने गोवा, झारखंड, व बिहार में राज्यपाल के पद का दुरूपयोग करते हुए वहां की प्रजातांत्रिक व्यवस्था को ध्वस्त किया है। उच्चतम न्यायालय ने न केवल बिहार विधानसभा को भंग करने के संप्रग सरकार के निर्णय को असंवैधानिक करार दिया है, अपितु अपना दिमाग इस्तेमाल न करने वाले नामित प्रधानमंत्री की, जिसके पास पद तो है पर कमांड नहीं है, अध्यक्षता वाली केन्द्रीय कैबिनेट की भी घोर भर्त्सना की है। इसके लिए राज्यपाल को अपना त्याग पत्र देना पड़ा था। संसदीय मानकों के उल्लघंन का इससे भी बड़ा उदाहरण हाल ही में तब देखने में आया जब संप्रग सरकार ने ''सोनिया बचाओ'' अध्यादेश लाने के लिए संसद का बजट सत्र का ही अचानक समापन कर दिया। इस तुच्छ षड़यंत्र में रंगे हाथों पकड़े जाने पर कांग्रेस पार्टी अपने अध्यक्ष के लोकसभा से तथा राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् के अध्यक्ष पद से बाध्यतापूर्ण इस्तीफे को 'त्याग' और 'शहादत' के एक अन्य उदाहरण के रूप में चित्रित कर रही है। भाजपा कांग्रेस के इस प्रयास को भारत के लोगों की बृध्दिमता के प्रति किया गया एक अपमान मानती है।

आम आदमी की नहीं, ''खास आदमी'' की सरकार

भाजपा का विश्वास है कि भारत के करोड़ों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की आर्थिक सुरक्षा के बिना राष्ट्रीय सुरक्षा अपूर्ण है। गरीबों तथा अमीरों के बीच तेजी से बढ़ती खाई कांग्रेस पार्टी द्वारा आम आदमी को दिए गए आश्वासनों के प्रति विश्वासघात का प्रमाण है। आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों में हुई भीषण वृध्दि के नीचे आम आदमी कराह रहा है। बेरोजगार युवकों को रोजगार देने के वायदे के बारे में भी युवकों के साथ विश्वासघात किया गया है। गत् 2 वर्षों में शिक्षित बेरोजगारों सहित रोजगारविहीन लोगों की संख्या में वृध्दि हुई है। बहुप्रचारित ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम भी केवल कागजों में सिमटकर रह गई है। सरकार ग्रामीण तथा शहरी दोनों ही असंगठित क्षेत्रों में कामगारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने में विफल रही है। अब अधिक सख्ंया में गरीब ग्रामीण अन्य शहरों की मलिन बस्तियों में जाकर रहने के लिए विवश हो रहे हैं। इन बस्तियों में जीवित रहने के हालात और अधिक बिगड़ रहे हैं।

किसानों की दयनीय स्थिति

अपने 1947 के बाद के इतिहास में भारत को आजकल गंभीरतम कृषि संकट से जूझना पड़ रहा है। संप्रग सरकार के विश्वासघात और निकम्मेपन के सबसे अधिक शिकार भारत के किसान हुए हैं जो बड़ी संख्या में आत्महत्या करने के लिए विवश हुए हैं। पंजाब, केरल तथा महाराष्ट्र्र जैसे अपेक्षाकृत अधिक सम्पन्न राज्यों में भी किसानों की आत्म-हत्या के मामले सामने आ रहे हैं। किसानों के लिए इनपुट की सभी साम्रगियों के दाम बढ़ गए हैं जबकि उनके उत्पाद के मूल्य जोड़ तोड़ वाले बाजार की दया पर निर्भर हैं। फसल बीमा योजना भी चरमरा रही है। सभी राज्यों में कोआपरेटिव क्रेडिट स्ट्रक्चर रूग्ण हो रहा है और सरकार कृषि उत्पादों की लाभकारी कीमत की मांग की अनदेखी कर रही है। किसान निजी स्रोतों से लिए गए कर्ज का भारी बोझ ढोने के लिए विवश हैं। कृषि क्षेत्र के इस संकट से खेतिहर मजदूर भी ऋणग्रस्तता और बढ़ती गरीबी में फंस रहे हैं। केन्द्र सरकार बिजली संकट को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाने में नाकाम रही है जिसके सबसे पहले शिकार किसान होते हैं। वाजपेयी सरकार की नदियों को आपस में जोड़ने की महत्वाकांक्षी परियोजना को त्यागकर संप्रग सरकार ने भारत के किसानों की दीर्घावधि जल सुरक्षा की प्रमुख चिंता को उपेक्षित कर दिया है।

वाजपेयी सरकार के विकास एजेंडे को तिलाजंलि

श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार के प्रगतिशील उपायों ने राष्ट्रीय गौरव और आत्मविश्वास का आधार तैयार किया था इससे तीव्र आर्थिक विकास, आधुनिकीकरण और विश्व में भारत की प्रतिस्पध्र्दात्मक क्षमता को बल व बढ़ावा मिला था। इन उपायों के लाभ विभिन्न क्षेत्रों में आज दिखाई देने लगे हैं। दुर्भाग्यवश संप्रग सरकार ने उन बहुत सारी महत्वकांक्षी विकास योजनाओं को या तो समाप्त कर दिया है या उनकी गति धीमी कर दी है जो वाजपेयी सरकार द्वारा शुरू की गई थी। वाजपेयी सरकार द्वारा बहुप्रचारित भारत को 2020 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के स्वप्न को भी इस सरकार ने समाप्त कर दिया है।

''भारत सुरक्षा'' के लिए भाजपा का व्यापक दृष्टिकोण

प्रिय देशवासियों! इस पुस्तिका से आपको स्पष्ट हो गया होगा कि भारतीय जनता पार्टी के पास ''भारत सुरक्षा'' की एक व्यापक और सांगोपांग दृष्टि है :

• भारत को भयमुक्त करके राष्ट्रीय सुरक्षा (बाह्य तथा आंतरिक दोनों) को सुरक्षित किया जाना;
• अल्पसंख्यकवाद की विघटनकारी राजनीति को परास्त कर राष्ट्रीय एकता की रक्षा करना;
• भ्रष्टाचार और अपराधीकरण के श्राप से राज्यतंत्र को बचाना;
• राष्ट्रीय संस्थाओं के दुरूपयोग तथा कांग्रेस पार्टी की ''मिथ्या त्याग-संस्कृति''' से संसदीय लोकतंत्र की रक्षा करना;
• किसानो, खेत मजदूरों, असंगठित तथा संगठित क्षेत्र के कामगारों, मध्यम वर्गों और सामान्यत: ''आम आदमी'' की आर्थिक सुरक्षा की गारंटी दिया जाना;
• अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्गों तथा सभी समुदाय के गरीब लोगों के बारे में सामाजिक समरसता के साथ-साथ सामाजिक न्याय की व्यवस्था करना;
• महिलाओं को न्याय, सामाजिक सम्मान प्रदान किए जाने तथा उनका सशक्त बनाए जाने की गारंटी देना;
• भारत के प्रत्येक बच्चे को शैक्षिक सुरक्षा, प्रत्येक युवा भारतीय को रोजगार सुरक्षा तथा प्रत्येक भारतीय नागरिक को स्वास्थ्य सुरक्षा जुटाना;
• भारत की अमूल्य आध्यात्मिक, सांस्कृतिक तथा कलात्मक विरासत को सरंक्षित रखना;

ये सभी बातें उस बहुआयामी विचारधारा में सम्मिलित हैं जिसका सम्मिश्रण भाजपा के भारत सुरक्षा के ''समान एजेंडा'' में हुआ है।

भाजपा का विश्वास है कि भारत सुरक्षा के इस सपने को केवल सुशासन, सिध्दांतबध्द राजनीति तथा भारतीय राष्ट्रवाद के आधारभूत मूल्यों के प्रति दृढ़ प्रतिबध्दता के माध्यम से ही साकार किया जा सकता है।

भाजपा का लक्ष्य है कि भारत सुरक्षा के इस प्रेरक सपने को देशभर के लोगों के पास प्रेषित किया जाए। भाजपा का यह भी प्रयास है कि वह लोगों को कांग्रेस पार्टी की विघटनकारी राजनीति तथा संप्रग सरकार के निकम्मेपन से भारत सुरक्षा को बढ़ रहे संकटों की जानकारी दे। भाजपा का दृढ़ विश्वास है कि अलग-अलग जाति, मजहब, भाषा तथा क्षेत्रगत पहचानों को भूलकर लोगों द्वारा की जाने वाली समवेत कार्रवाई राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित करेगी और उन लोगों के मंसूबों को विफल कर देगी जो भारत को दुर्बल और विघटित करना चाहते हैं। ''भारत सुरक्षा यात्रा'' इस दिशा में किया जाने वाला एक विनम्र प्रयास है।

भाजपा देशप्रेम के इस अनूठे अनुष्ठान में आप सबका समर्थन, साझीदारी और आशीर्वाद चाहती है।

 वन्देमातरम्!

 

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