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सूचना प्रौद्योगिकी के बारे में आडवाणीजी के विचार |
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विगत में भारत के अनेक लोग टेलिफोन सुविधाओं की कमी से काफी निराश रहते थे। इस हॉल में उपस्थित अधिकांश युवाओं को शायद यकीन नहीं होगा कि स्वतंत्रता- प्राप्ति के बाद लगभग 50 वर्षों में सामान्य टेलिफोन कनेक्शन प्राप्त करने के लिए लम्बी प्रतीक्षा सूचियां हुआ करती थी। लोग सांसद कोटे से टेलिफोन का कनेक्शन हासिल करने के लिए मेरे जैसे सांसदों के पास आया करते थे।
श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन सरकार (1998-2004) ने एक साहसिक नई टेलिफोन नीति बनाकर इन सब बातों में बदलाव ला दिया था - इसका सबूत आप मोबाइल फोन में देख रहे हैं जिसका आप अपने दोस्तों से बातचीत करने, एस.एम.एस. भेजने के लिए हर समय इस्तेमाल करते हैं। इसका सबूत इंटरनेट में देख रहे हैं जिसके जरिए आप सूचना, समाचार और ई-मेल प्राप्त करते हैं।
मैं समझता हूं कि इंटरनेट एक युगान्तरकारी खोज है जिसकी तुलना पहिए और बिजली के अन्वेषण से की जा सकती है। हम भारत को न केवल लाभ पहुंचाना चाहते थे बल्कि सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.) के जरिए परिवर्तन लाना चाहते हैं।
प्रौद्योगिकी युवाओं को अपना जीवन जीने के तरीके में बदलाव ला रही है। आपके पास डीजिटल विश्व में फेसबुक और ऑरकुट जैसे अपने काल्पनिक समुदाय और सामाजिक नेटवर्क हैं। मैं इस रूख का स्वागत करता हूं। युवक हमेशा सृजनात्मक और अभिनव कार्य करने में तत्पर रहते हैं। उनकी सृजनात्मकता को विकसित और प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
&दिनांक 20 अक्तूबर, 2008 को नई दिल्ली में ''इंडिया बनाओ'' द्वारा आयोजित विद्यार्थियों के साथ बातचीत सत्र में श्री लालकृष्ण आडवाणी द्वारा दिए गए भाषण से।
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