 (बाएँ से दाएँ ) पत्नी कमला, पुत्री प्रतिभा, आडवाणी, पुत्र जयंत व पुत्रवधू गीतिका। एक राजनेता के लिए परिवार तथा राजनीतिक व समाजिक कार्यों की मांगों के बीच संतुलन बनाना आसान काम नहीं है। यह उन लोगों के लिए और भी अधिक कठिन है जो राजनींति को जीवन-पर्यन्त एक मिशन के रूप में लेते हैं। श्री आडवाणी जी उन असाधारण जन नेताओं में से एक हैं जिनके लिए संसार ही उनका परिवार है और उनका परिवार ही संसार है। उन्हें दोनों ही संसारों में सुख, सद्भाव और शक्ति की अनुमति हुई है। जैसाकि उन्होंने प्रसिध्द अमेरिकन दार्शनिक जॉर्ज संतायाना को उद्यृत करते हुए अपनी जीवनी में लिखा है ''परिवार प्रकृति की एक श्रेष्ठ कलाकृति है। मैंने इस सत्य का अनुभव अपने जीवन में हरेक दिन किया है।''आडवाणी जी का एक संयुक्त और आपस में जुड़ा हुआ परिवार है जिसमें उनकी धर्मपत्नी कमलाजी, पुत्र जयंत, पुत्री प्रतिभा और पुत्रवधु गीतिका है। वे सभी एक ही छत के नीचे अपने सरकारी आवास 30, पृथ्वीराज रोड़, नई दिल्ली में रहते हैं। उनकी तरह ही कमलाजी का परिवार भी देश के विभाजन के बाद कराची से विस्थापित होकर आया था। कमला जी को भी आम नागरिकाें की तरह कठिन जीवन जीना पड़ा। उन्होंने लगभग 17 वर्षों तक दिल्ली तथा मुम्बई के जनरल पोस्ट ऑफिस में कार्य किया। उन दोनों का 25 फरवरी, 1965 को मुम्बई में विवाह हुआ। शुरू से ही, कमला जी का घर के सभी मामलों में-वित्त से लेकर भोजन की व्यवस्था करने तक-पूरी तरह नियंत्रण रहा है। वस्तुत: राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन (एन.डी.ए.) शासन के दौरान श्री आडवाणी जी अपने दोस्तों से मजाक में कहा करते थे कि ''मैं भारत का गृहमंत्री हो सकता हूं, लेकिन हमारे परिवार की गृहमंत्री कमला हैं।'' जयंत और प्रतिभा अपना प्रोफेशनल जीवन जी रहे हैं। जयंत दिल्ली में अपना एक छोटा सा कारोबार चलाते हैं। वे क्रिकेट के बहुत ही शौकीन हैं और भारत के टेस्ट खिलाड़ियों-पूर्व तथा वर्तमान-दोनों में से अनेक उसके दोस्त हैं। प्रतिभा एक प्रसिध्द टी.वी. व्यक्तित्व हैं। कई चैनलों पर प्रसारित किये जाने वाले कार्यक्रमों की एंकरिंग तथा प्रस्तुति करती हैं। उन्होंने टी.वी. चैनलों के लिए हिन्दी सिनेमा पर आधारित कथ्यपरक कार्यक्रम तैयार करने में विशेषता हासिल की है। इन कार्यक्रमों में राम, कृष्ण, शिव, गणेश और हनुमान तथा हिन्दी सिनेमा में होली, दीवाली और राखी के त्यौहारों को प्रमुख स्थान दिया गया है। प्रतिभा ने हिन्दी सिनेमा में 'वन्दे मातरम्' पर एक फिल्म भी बनाई है। इन कार्यक्रमों में सांस्कृतिक तथा देशभक्तिपूर्ण मूल्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए इनकी व्यापक रूप से सराहना की गर्इ्र है। श्री आडवाणी जी की स्वर्णजंयती रथ यात्रा (1997) तथा भारत सुरक्षा यात्रा (2006) पर बनी फिल्में भी प्रतिभा के कार्यों में शामिल हैं।
आडवाणीजी कहते हैं कि उन्हें इस बात का गर्व है कि उनके बच्चे ऐसे व्यवसायों में लगे हुए हैं जो राजनीति से पूरी तरह अलग हैं। प्रतिभा काफी समय से 'आडवाणी' उपनाम का इस्तेमाल नहीं कर रही थी, क्योंकि वह अपनी अलग पहचान बनाना चाहती हैं। इसका राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन (एन.डी.ए.) के शासन काल के दौरान एक रोचक अनुभव रहा। जब प्रतिभा एक प्रसिध्द फिल्म निर्माता, विधु विनोद चोपड़ा का साक्षात्कार लेने गई, तो उसने पूछा ''क्या आप फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से खुश हैं?'' उन्होंने उत्तर दिया, 'नहीं सचमुच नहीं।' इस समय फिल्म उद्योग के सामने सबसे बड़ी समस्या 'पायरेसी' की है। लेकिन मै नहीं सोचता कि हमारे गृहमंत्री जी को इसके बारे में कुछ जानते होंगे।'' साक्षात्कार के बाद किसी व्यक्ति ने उनसे कहा,''क्या आप जानते हैं कि आप किससे बात कर रहे थे? वे गृहमंत्री की बेटी हैं।'' चोपड़ा प्रतिभा के पास आए और कहा, 'ओह, मैं नहीं जानता था.......। इसके बाद वे श्री आडवाणी जी के परिवार के अच्छे मित्र बन गये। यदि प्रतिभा का अपने पिता के राजनीतिक जीवन से कोई सम्बन्ध है तो यही कि श्री आडवाणी घर पर चुनिन्दा दर्शकों को उनकी फिल्में दिखाने के शौकीन हैं। प्रतिभा भी अक्सर अपने सिनेमा प्रेमी पिता के लिए अच्छी फिल्मों की विशेष स्क्रीनिंग की व्यवस्था करती रहती है। श्री आडवाणी अपनी पुत्री के बारे में कहते हैं,''प्रतिभा का अर्थ होता है-प्रतिभाशाली व्यक्ति और वास्तव में वह इसी के अनुरूप है। उसकी सोच परिवार में किसी दूसरे व्यक्ति से ज्यादा उनसे मिलती है। उसने मेरी रूचियां, अरूचि, मेरे मूल्यों और परम्पराओं जिनमें मैं विश्वास रखता हूं, को आत्मसात् किया है। मेरा उसके साथ एक विशेष भावनात्मक बंधन है, क्योंकि वास्तव में, वह मेरी शक्ति का स्तंभ है। वह मेरी छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखती है।''
परिवार वास्तव में प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में स्थिरता, शक्ति तथा हर्ष का मुख्य आधार है। लेकिन उन लोगों के मामले में परिवार विशेष महत्व रखता है, जो सार्वजनिक जीवन का रास्ता चुनते हैं। आडवाणी जी लिखते हैं कि ''परिवार ऐसा स्थान है जहां मुझे असीम सुख व आनन्द की प्राप्ति होती है।'' ''यहीं पर मैंने राजनीति में आए उतार-चढ़ावों के समय स्वयं के प्रति यह अनुभव किया कि जिन्दगी में परिवार ने मुझे इतना प्यार दिया, कितनी सुरक्षा दी और मेरा पूरा ध्यान दिया। इससे भी ज्यादा जब मैं किसी बैठक या किसी दौरे से लौटकर घर आता था तो अनुभव करता था कि मानों मैं अपने निजी ब्रह्मांड में आ गया हूं, जहां मुझे न कोई चिन्ता है, न कोई शिकायत, सिर्फ सन्तोष ही सन्तोष है।''
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