Homearrow आडवाणीजी के बारे में arrow आडवाणीजी की आत्म-कथा arrow विभिन्न व्यक्तियों के विचार
विभिन्न व्यक्तियों के विचार
Print Print      
SocialTwist Tell-a-Friend

भैरों सिंह शेखावत, भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति

''आडवाणीजी ने यह पुस्तक लिखकर एक साहसिक कार्य किया है। मैं आशा करता हूं कि यह पुस्तक समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत सहायक सिध्द होगी।"

 

मोहनराव भागवत, सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

''आडवाणीजी ने यह पुस्तक एक स्वंयसेवक की भाँति लिखी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक अच्छा स्वयंसेवक प्रत्येक कार्य-क्षेत्र में, जहां वह सक्रिय है, एक देशभक्त कार्यकर्ता की भूमिका निभाता है। सार्वजनिक जीवन में एक स्वयंसेवक का जीवन जीना बहुत कठिन है, लेकिन उसको जीना ही चाहिए। और श्री आडवाणी ने ये दोनों काम बखूबी किए हैं।"

 

जसवंत सिंह, नेता प्रतिपक्ष (राज्यसभा)

''मैं मानता हूँ कि आडवाणीजी आज के भारत में सर्वाधिक गलत ढंग से समझे जाने और गलत ढंग से पहचाने जाने वाले नेताओं में से एक हैं। वह मस्जिदों को तोड़ने या ऐसी बातों से बहुत दूर हैं। यह पुस्तक एक पथ-प्रदर्शक है और विगत अनेक दशकों के भारतीय राजनीति तथा सामाजिक इतिहास में एक बहुमूल्य योगदान है।"

 

चो. रामस्वामी, प्रसिध्द तमिल पत्रिका 'तुगलक' के संपादक

"आडवाणीजी ईमानदारी, प्रामाणिकता और सार्वजनिक जीवन में शुचिता वाले व्यक्ति हैं। वे वस्तुनिष्ठ आकलन करते हैं और उनकी शक्ति इसमें निहित है कि वे प्रत्येक संकट को एक चुनौती के रुप में लेते हैं, और प्रत्येक चुनौती को एक जिम्मेदारी के रुप में देखते हैं, जिसे वह तत्परता से निभाते हैं। इस पुस्तक के शीर्षक से मेरी थोड़ी असहमति है, क्योंकि यह देश उनका जीवन रहा और उनका जीवन देश बन गया। यह पुस्तक अधूरी भी है, क्योंकि अभी इसमें एक और अध्याय लिखे जाने की जरुरत है। वह अध्याय आडवाणीजी के प्रधानमंत्री बनने के बाद लिखा जाएगा।"

 

top

Print Print      
SocialTwist Tell-a-Friend