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नई दिल्ली में भारतीय उद्योग परिसंघ (सी.आई.आई.) के राष्ट्रीय सम्मेलन और वार्षिक सत्र 2008 में ''भारत उत्थान : सबके लिए विकास-निरन्तर विकास'' विषय पर 30 अप्रैल, 2008 को दिए गए भाषण से उध्दरण। शिक्षा और स्वास्थ्य-सेवा में 'स्वर्णिम चतुर्भुज' वह क्षेत्र है जिसमें हमारा सबसे अधिक ध्यान शिक्षा के सभी क्षेत्रों में अवसरों के व्यापक विस्तार पर रहेगा। मेरा मानना है कि यह क्षेत्र आर्थिक वृध्दि को सर्वव्यापी और सतत् बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। यदि हम आज भारत में शैक्षणिक परिदृश्य को देखें, तो पाते हैं कि अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों से लाइसेंस-कोटा-परमिट राज आंशिक रूप से या पूरी तरह से समाप्त हो गया है, मगर शैक्षणिक क्षेत्र में यह न केवल मौजूद है अपितु फल-फूल भी रहा है-विशेषकर उच्च और व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में। एक अध्ययन के अनुसार ''इस समय शिक्षा प्रणाली एक ओर सरकार के अत्यधिक नियंत्रण और दूसरी ओर भेदमूलक निजीकरण के बीच फंसी हुई है जिससे इस क्षेत्र में सही ढंग से निजी पूंजी जुटाई नहीं जा पा रही है।'' पहला, शिक्षा के क्षेत्र में विभिन्न नियामक संस्थाएँ न केवल भ्रष्ट और अत्यधिक नौकरशाही वाली बन गई हैं अपितु वास्तव में वे भारत में शैक्षिक आधारभूत ढांचे के विकास में अवरोधक भी बन गई हैं। हमें सुधार के तेज हथियार से अनावश्यक नियंत्रण की प्रत्येक परत को हटाना है, साथ ही हरेक विनियमन को मजबूत बनाना है ताकि शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता बढ़ाई जा सके और जवाबदेही निर्धारित की जा सके। दूसरा, क्षमता निर्माण] इसके तहत निजी क्षेत्र अौर लोकहितैषी संस्थाओं को विस्तार की बड़ी आर्थिक लागत में अंशदान देना होगा। यदि यह सफलतापूर्वक क्रियान्वित हो जाए तो इन कदमों से हमारी प्रतिभाशाली लड़कियों और लड़कों को इंजीनियरिंग, मेडिसन, मैनेजमेंट, कृषि, पशुपालन विज्ञान और हाल के वर्षों में उभरे नए क्षेत्रों में पर्याप्त और गुणवत्ता वाली सीटें हासिल हो सकेंगी। अंतिम बात, उच्च और व्यावसायिक शिक्षा को सर्वव्यापी बनाने के उद्देश्य से हमें छात्रवृत्तियाँऔर आकर्षक शैक्षणिक ऋण भारी मात्रा में बढ़ाने हाेंगे ताकि कोई भी पात्र विद्यार्थी अपनी पसंद कीशिक्षा पाने के अवसर से वंचित न रह सके। मैं मानता हूँ कि शिक्षा का लोकतांत्रिकरण सामाजिक औरआर्थिक विकास के लोकतांत्रिकरण की कुंजी है। संक्षेप में, हमारा प्रयास यह रहेगा कि शिक्षा और स्वास्थ्य-सेवा के क्षेत्र में 'स्वर्णिम चतुर्भुज' बने-जोकि सुशिक्षित भारत, स्वस्थ्य भारत और समृध्द भारत के लक्ष्य को पाने के लिए हमारे बच्चों और युवाओं के लिए एक नया राजमार्ग सिध्द हो सके । |