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विकास और आधारभूत ढांचे के बारे में आडवाणीजी के विचार
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एसोचेम के 87वें वार्षिक समारोह में दिए गये भाषण से उध्दरण

नई दिल्ली-3 जून, 2008

भारतीय जनता पार्टी विकास के भारतीय मॉडल के लिए एक 'ब्लू प्रिंट' तैयार करेगी

विकास के भारतीय मॉडल की  आवश्यकता क्यों है?

मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि जिस तरह से भारत का आर्थिक विकास पहले सोवियत मॉडल से बुरी तरह प्रभावित था, अब पश्चिमी मॉडल की नकल करके पेन्डुलम के दूसरे सिरे पर लटक गया है। किसी दूसरे बाहरी मॉडल को अपनाकर भारत की मौजूदा समस्याओं को हल नहीं किया जा सकता है और भावी जरूरतों को भी पूरा नहीं किया जा सकता है।

मैं यह उल्लेख करना चाहूंगा कि जिस तरह से मेरी पार्टी अर्थव्यवस्था पर राज्य के अत्यधिक नियंत्रण के खिलाफ थी, उसी तरह राज्य के आर्थिक जीवन में कोई भूमिका न रखने वाले राज्य के विचार का भी विरोध किया गया था। दूसरे शब्दों में, हमने उन्मुक्त उद्यम, ''ट्रिकल डाऊन'' सिध्दांत आदि का भी समर्थन नहीं किया। लोकतांत्रिक राष्ट्र का एक निश्चित और अनिवार्य कर्तव्य है कि वह आर्थिक विकास को वांछित सामाजिक लक्ष्यों की ओर अभिमुख करें जैसाकि भारतीय परम्परा में कहा जाता है ''बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय।'' अन्तोदय (समाज के 'अंतिम' आदमी का विकास) की अवधारणा की महात्मा गांधी और पं0 दीनदयाल उपाध्याय जो उस राजनीतिक आन्दोलन के प्रमुख सिध्दांतकार तथा प्रेरणादायी मार्गदर्शक थे जिसने भारतीय जनसंघ तथा बाद में , भारतीय जनता पार्टी को जन्म दिया, ने प्रशंसा की थी।

वास्तव में, आर्थिक विकास से न केवल समाज के प्रत्येक व्यक्ति तथा प्रत्येक वर्ग को लाभ पहुंचना चाहिए बल्कि इससे पर्यावरण की भी सुरक्षा होनी चाहिए। यह मनुष्य तथा प्रकृति के बीच सम्बन्धों की दिशा में भारतीय दृष्टिकोण का एक अभिन्न अंग भी है। हाल के दशकों में पर्यावरण में ह्रास की चिन्ता विश्वभर में बढ़ गई है। और, यह बात ज्ञात है कि विकास का पश्चिमी मॉडल पर्यावरण के लिए बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है।

हमें यह याद रखना भी उतना ही जरूरी है कि मनुष्य का भौतिक विकास, कला, संस्कृति और आध्यात्मिकता के क्षेत्रों में उसके उच्च विकास के लिए आधार होना चाहिए। भारत के मनीषियों तथा बुध्दिजीवियों ने सदियों से मनुष्य और समाज के समन्वित विकास पर बल दिया है।

इस तरह के मामले में, मुझे पहले से कहीं ज्यादा विश्वास हो गया है कि हमें विकास का एक ऐसा भारतीय मॉडल तैयार करना होगा जो भारत की जरूरतों के अनुकूल हो, जो जीवन के प्रति भारतीय दृष्टिकोण से प्रेरित हो तथा स्वयं भारतीयों की पूर्ण भागीदारी पर भरोसा रखता हो। क्या विश्व  के अनेक देश विकास का अपना ऐसा मॉडल विकसित करने की कोशिश नहीं कर रहे हैं जो उनकी विशिष्ट परिस्थितियों, दबावों, संसाधनों और संस्कृतियों पर आधारित हो? मैं चीन, सिंगापुर, मलेशिया, तुर्की, रूस और कई अन्य देशों का उदाहरण दे सकता हूं।

सभी प्रमुख भागीदार-केन्द्र और राज्य सरकारों, राजनीतिक संस्थाओं, व्यापार समुदायों के लोगों, अर्थशास्त्रियों तथा अन्य व्यावसायिक लोगों, जनसंचार और अन्य क्षेत्रों से सम्बध्द लोगों जो इस सामूहिक दृष्टिकोण् को विकसित करने हेतु भारत के आर्थिक विकास से जुडे हुए हैं, के लिए विचार करने का अब समय आ गया है कि गरीबी उन्मूलन, उत्पादक रोजगार सृजन हमारे समाज के सभी वर्गों तथा देश के सभी क्षेत्रों के समान विकास और भारत के आम आदमी के जीवन-स्तर में पर्याप्त सुधार के प्राथमिक उद्देश्य सहित त्वरित विकास के लक्ष्य को किस तरह से हासिल किया जा सकता है? आने वाले महीनों में भारतीय जनता पार्टी की यह कोशिश होगी कि वह विकास के इस भारतीय मॉडल का 'ब्लू प्रिंट' तैयार करे। इस प्रयास में हम एसोचेम, अन्य व्यापार संघों तथा बुध्दिजीवियों आदि के विचारों और सुझावों का स्वागत करेंगे।

सुशासन का अत्यधिक महत्व

जहां तक भारतीय जनता पार्टी का सम्बन्ध है, मैं आपको बता दूं कि हमारी व्यापक नीति क्या है। हमें विश्वास है कि ईमानदार, भ्रष्टाचार रहित, कारगर और परिणामोन्मुखी सुशासन हमारे देश में व्याप्त अनेक समस्याओं का उपचार है। भारत के सन्दर्भ में, सुशासन में आर्थिक विकास के उन क्षेत्रों पर भी प्राथमिकता से ध्यान दिया जाता है जिससे भारत के अधिकांश लोग जुडे हुए हैं। भारत के कॉरपोरेट जगत ने अच्छा कार्य किया जिसकी ओर उच्चस्तरीय संस्थाओं ने लगातार ध्यान दिया है। भारत के गैर-कॉरपोरेट ने नुक्सान उठाया है क्योंकि इसकी ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। इस स्थिति में बदलाव आना चाहिए।

इसलिए कृषि, लघु व मझौले और ग्राम्य आधारित उद्योगों कला तथा शिल्प, ग्रामीण तथा शहरी इलाकों में अर्थव्यवस्था के अनौपचारिक क्षेत्रों की लम्बे समय से चली आ रही उपेक्षा को समाप्त करने की तत्काल जरूरत है। इसमें कोई सन्देह नहीं है कि इस बदलाव को लाने में केन्द्र तथा राज्य सरकारों को मुख्य भूमिका निभानी होगी। लेकिन मुझे यकीन है कि गांवों में पंचायतों तथा कस्बों और शहरों में नगर निगम निकायों को प्रभावी रूप से अधिकार सौंपना शासन में सुधार का मुख्य क्षेत्र है।

मेरी पार्टी हमेशा से शासन के विकेन्द्रीकरण में विश्वास रखती आई है। इसके विपरीत, उत्तरोत्तर कांग्रेस सरकारों ने शासन का जो ढांचा तैयार किया है, वह अत्यंत केन्द्रीयकृत है और लोकतंत्र तथा विकास , दोनों के लिए ही नुक्सानदेह है। इसलिए, हमारा यह प्रयास होना चाहिए कि यदि हमें केन्द्र में शासन करने का मौका मिला तो हम कई शक्तियों और कर्तव्यों को केन्द्रीय सरकार से राज्य सरकारों को हस्तांतरित करेंगे और राज्य सरकारों से भी यह अनुरोध करेंगे कि वे भी अपनी कुछ शक्तियों तथा कर्तव्यों को स्थानीय निकायों को हस्तांतरित करें।

मेरी अपनी समझ में आर्थिक विकास का एक नया घटक है-मनुष्य की सृजनात्मक क्षमता का लाभ उठाने हेतु प्रौद्योगिकी विशेषकर सूचना प्रौद्योगिकी। जैसाकि आमतौर पर कहा जाता है, सूचना प्रौद्योगिकी ने दूरी की सीमा को समाप्त कर दिया है। इसने महाद्वीपों, राष्ट्रों, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच की दूरी को पाट दिया है। मुझे पूरा यकीन है कि इसकी शक्ति का भारतीय समाज में क्रान्तिकारी परिवर्तन लाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसलिए, भारत के प्रत्येक गांव और भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रत्येक क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी को किस तरह से शामिल किया जाए, यह विकास के भारतीय मॉडल के लिए 'ब्लू प्रिंट' का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

आइए, हम भारतीय युवाओं के लिए अवसरों का सृजन करें

तीव्र तथा संतुलित विकास हासिल करने के लिए आज की सबसे बड़ी और अत्यंत तात्कालिक जरूरत है-सभी स्तरों पर देश के लोगों के लिए अवसरों में वृध्दि करना। देशभर में प्रतिभाशाली युवाओं का एक जबरदस्त बल्कि लगभग असीमित भण्डार मौजूद है। उनमें से अधिकांश युवाओं के लिए अवसरों का अभाव है। जब उन्हें उपयुक्त अवसर मिलता है तो वे अपनी उपलब्धियों से हमें निरपवाद रूप से आश्चर्यचकित कर देते हैं।

मैं इसे और स्पष्ट करने के लिए हाल ही मैं सम्पन्न हुए आई.पी.एल. 20-20 टूर्नामेंट का उदाहरण देता हूं। इस टूर्नामेंट में चमकने वाले अनेक सितारों में-युसूफ पठान, शिखर धवन, स्वप्निल असोंदकर इत्यादि भी थे-इसमें से अनेक लोगों ने इनके नाम नहीं सुने होंगे। कम से कम मैंने तो नहीं, यद्यपि क्रिकेट में मेरी गहन रूचि है-क्योंकि अपने स्कूली दिनों में, मैं क्रिकेट खेलता था और दूसरे मेरा बेटा जयंत इस विषय पर पूरा 'विश्वकोष' (इनसाइक्लोपीडिया) है। जब इन युवा खिलाड़ियों को अवसर मिला तो उनकी प्रतिभा सामने आई।

यही वह बिन्दु है जहां मैं महत्वपूर्ण आधारभूत विकास-चाहे यह भौतिक हो या सामाजिक-का महत्व देखता हूं। मैं सोचता हूं कि आधारभूत विकास  अवसरों को अत्यधिक बढ़ाना और अवसरों का लोकतांत्रिकरण करना है। अत: जब वाजपेयी सरकार ने स्वर्णिम-चतुर्भुज परियोजना या प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत पक्के ग्रामीण रास्ते बनाए तो हमने अर्थव्यवस्था के बड़े और लघु क्षेत्र की प्रगति के नए रास्ते खोले, इसने दोनों-निर्गम भारत और गैर-निर्गम भारत की सहायता की। एक महत्वपूर्ण ढंग से इसने आर्थिक लोकतंत्र को प्रोत्साहित किया।

इसी प्रकार, जब गुजरात सरकार ज्योतिग्राम योजना के तहत सप्ताह ंके सातों दिन चौबीस घंटे प्रदेश के लगभग अधिकांश गांवों और झोपड़ियों की विद्युत आपूर्ति करती है तो इससे हजारों-लाखों निर्धन विद्यार्थियों को पढ़ाई में सुविधा होने के साथ-साथ इससे ग्रामीणों को नए रोजगार तथा धन-निर्माण के अवसर पैदा होते हैं। मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में राज्य के प्रत्येक गांव को 'ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी' से जोड़ने की घोषणा की है। निश्चित ही इससे व्यापक स्तर पर नए अवसरों और संभावनाओं का जन्म होगा जिससे गुजरात के गांव 'विश्व गांव' के और निकट आ सकेंगे।

मैं दूसरा उदाहरण देता हूं। 'इण्डिया टुडे' के ताजा अंक में मध्यप्रदेश में शुरू की गई तीन अनोखी स्वास्थ्य पहलों की हृदय को छूने वाली रिपोर्ट प्रकाशित की है। जननी सुरक्षा, जननी एक्सप्रेस और मातृशक्ति-योजनाएं कैसे गर्भवती महिलाओं और नवजातों की देखभाल में उल्लेखनीय सुधार ला रही है। सन् 2004 में मध्यप्रदेश, मातृ मृत्युदर (498 प्रति लाख) और शिशु मृत्युदर (76 प्रति हजार) जैसे ज्यादा दर वाले राज्यों की श्रेणी में खड़ा था। ये दो मानक संयुक्त राष्ट्र संघ के मानक विकास सूचकांक के भाग हैं, जिनकी कसौटी पर भारत पीछे रहा है। हालांकि, मध्यप्रदेश अभी तक कमजोर स्वास्थ्य सूचकांकों के चलते बीमार माना जाता रहा है। अब 2008 में भोपाल में हमारी पार्टी की सरकार के उक्त तीनों कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के चलते मातृत्व मृत्युदर गिरकर 354 और शिशु मृत्युदर 66 रह गयी है।

यहां यह कहना उपयुक्त होगा कि कोई एक दल या समाज का कोई एक हिस्सा इस लक्ष्य को अकेला हासिल नहीं कर सकता। यह सामूहिक राष्ट्रीय प्रयासों से ही करना होगा।

एक छोटे रूप में, हमारे व्यापार और प्रोफेशनल लोगाेंं के समुदाय ने पिछले दिनों में वह कर दिखाया है, भारत जिसकी क्षमता रखता है। अब एक और महान चुनौती तथा ज्यादा पारितोषिक देने वाला अवसर हमारी प्रतिक्षा कर रहा है-और वह हमें दिखाना है कि एक बिलियन सशक्त लोग आने वाले दिनों में क्या करने में सक्षम हैं।

आइए, हम अपने महान राष्ट्र की पूर्ण क्षमताओं का भरपूर इस्तेमाल करने हेतु मिलकर काम करें।

 

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