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गुजरात में साम्प्रदायिक हिंसा : काल्पनिक प्रचार बनाम यथार्थ के बारे में

मैं गृह मंत्रालय में अपने छह वर्षों का विवरण इस घटना के साथ समाप्त कर रहा हूँये एक नहीं, बल्कि दो परस्पर जुड़ी घटनाएँ हैंजब छह वर्ष तक के कार्यकाल में वाजपेयी सरकार, हमारी पार्टी तथा उसकी विचारधारा की छवि धूमिल करने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरजोर ढंग से निरंतर प्रचार अभियान चलाया गया था। मैं फरवरी-मार्च 2002 में गोधरा कांड तथा गोधरा के पश्चात् के दोनों चरणों में गुजरात में भड़की सांप्रदायिक हिंसा का उल्लेख कर रहा हूँ। मैंने बार-बार कहा है कि दोनों घटनाएँ ऐसी थीं जो असमर्थनीय थीं और 'मेरी सरकार के नाम पर लगा धब्बा' थीं। मैं इन घटनाओं से बहुत अधिक दु:खी हो गया था; क्योंकि इन घटनाओं से वाजपेयी सरकार की छवि धूमिल हो गई थी, जिसका अभी तक यह रिकॉर्ड रहा था कि उसके शासन काल में देश में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं की संख्या में बहुत अधिक कमी आई है।

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मीडिया के बारे में आडवाणीजी के विचार

आज 'मीडिया' शब्द में, उस समय की अपेक्षा जब मैं पत्रकार और सूचना एवं प्रसारण मंत्री था, आज एक वृह्द आकार वाला प्रचार-प्रसार मंच शामिल है। उस समय केवल नॉन-प्रिन्ट मीडिया मंच- दूरदर्शन और आकाशवाणी दोनों ही पूरी तरह से सरकार के नियंत्रण में था। आज टीवी चैनलों तथा एफ.एम. रेडियो चैनलों के उद्भव के अलावा हम मीडिया के इतिहास में एक सबसे बड़ी क्रांति : इंटरनेट का विकास देख रहे हैं।

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वरिष्ठ नागरिकों के बारे में आडवाणीजी के विचार

 यदि ऐतिहासिक तौर पर कहा जाए तो हमारे देश में ''वरिष्ठ नागरिकाें'' ंकी धारणा अभी हाल की उपज है। क्योंकि 'नागरिक' की अवधारणा की उत्पत्ति, जैसाकि आधुनिक संवैधानिक दृष्टि से अर्थ लगाया गया है, ''राष्ट्र-राज्य'' की स्थापना के बाद हुई है। भारत एक प्राचीन राष्ट्र है जिसका हजारों साल पुराना इतिहास है। प्राचीन समय में हमारे देश की जनता के अधिकारों और जिम्मेदारियों को किसी संविधान में विधिबध्द नहीं किया जाता था बल्कि वे हमारी संस्कृति और जीवन के हमारे आध्यात्मिक दृष्टिकोण में निहित थे। पिछली सदियों के बुध्दिमान बुजुर्ग लोगों ने भारत में एक ऐसा सांस्कृतिक वातावरण बनाया था जिसमें प्रत्येक व्यक्ति से यह आशा की जाती थी कि वह जीवन के चार आश्रमों में एक आश्रम से उठकर अगले आश्रम की ओर बढे। मानो वह एक सीढ़ी पर चढ़ रहा हो और जितना भी संभव हो, वह आत्म- अनुभूति प्राप्त करने का प्रयत्न कर रहा हो।

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