Homearrow आडवाणीजी के बारे में arrow आडवाणीजी के लेख
केवल निराशा और अनिश्चितता
By लालकृष्ण आडवाणी इकनॉमिक टाइम्स |  Wednesday, 18 February 2009
यू.पी.ए. सरकार के अंतरिम बजट के अवसर पर इकनॉमिक टाइम्स के प्रकाशित होने वाले विशेषांक में एक संक्षिप्त लेख लिखने का मुझसे अनुरोध करते हुए 'द इकनॉमिक टाइम्स' के संपादक ने अपने पत्र में कहा है : आपको याद होगा कि भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन सरकार के कार्यकाल के दौरान Gross Domestic Happiness (सकल पारिवारिक प्रसन्नता) शब्द प्रचलित किया गया था।
Read more...
राम : भारतीय संस्कृति के प्रेरणास्पद प्रतीक
By लालकृष्ण आडवाणी द वीक |  Sunday, 27 January 2008

अयोध्या में भगवान राम के जन्मस्थान पर एक भव्य मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए जन आंदोलन सन् 1947 के बाद भारत में एक बड़ी घटना है। इस आंदोलन ने इतना जोर क्यों पकड़ा और इसने ऐसी मजबूती क्यों दिखाई? इसका उत्तर हमारे राष्ट्रीय जीवन में राम और रामायण के महत्व को समझने में निहित है। अन्य महान भारतीय महाकाव्यों के साथ-साथ महाभारत और रामायण ने भारतीयों की सांस्कृतिक भावना और नीतिपरक मूल्य-पध्दति को पीढ़ी-दर-पीढ़ी और सदी-दर-सदी पोषित किया है। राम एक आदर्श राजा थे। इसलिए, महात्मा गांधी ने सुशासन के सार 'राम राज्य' की अवधारणा का भारत के लिए आदर्श के रूप में गुणगान किया। राम एक आदर्श मानव भी थे, इसलिए उन्हें ''मर्यादा पुरूषोत्तम'' कहा जाता है।

Read more...
क्रांतिकारी लड़ाई का संस्मरण, एक क्रांतिकारी पुस्तक
By लालकृष्ण आडवाणी   Tuesday, 08 May 2007

1857 की वर्षपर्यन्त मनाई जाने वाली 150वीं वर्षगांठ के शुभारंभ के अवसर पर भारत की स्वतंत्रता की पहली लड़ाई के शहीदों और वीरों को श्रध्दाजंलि

Read more...
मेरे सपनों का भारत
By लाल कृष्ण आडवाणी   Friday, 14 August 1987
लार्ड मैकाले ने एक बार निन्दनीय ढंग से टिप्पणी की थी कि मिडिलसेक्स में एक एकड़ जमीन होना आदर्श-लोक (यूटोपिया) में जागीर होने की अपेक्षा बेहतर है।
Read more...